जीटी रोड चौड़ीकरण परियोजना के तहत रेलवे जंक्शन के वीआईपी गेट के समीप स्थित लगभग दो सौ वर्ष पुराने मां काली मंदिर के ध्वस्तीकरण के दौरान शुक्रवार देर रात बड़ा हादसा हो गया। मंदिर का गुमद अचानक भरभराकर गिरने से उसकी चपेट में आए लोक निर्माण विभाग के कार्यदायी संस्था के मजदूर बलदेव यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद लोक निर्माण विभाग और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फोकलन और जेसीबी से मंदिर का ऊपरी हिस्सा गिराया जा रहा था। इसी दौरान बिना पर्याप्त सुरक्षा घेरे और तकनीकी एहतियात के गुमद अचानक ढह गया। बलदेव यादव मलबे में दब गए। मौके पर मौजूद लोगों ने काफी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला। पहले उन्हें राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर रेफर कर दिया गया। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। बलदेव यादव दांडी गांव के निवासी थे और लोक निर्माण विभाग में संविदा पर कार्यरत थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ध्वस्तीकरण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। कार्यस्थल को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया गया था और श्रमिकों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम भी नहीं थे। उल्लेखनीय है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना के दौरान पहले भी जर्जर दुकान का मलबा हटाते समय एक मजदूर की जान जा चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया। रात में मशीनों की आवाज सुनकर बड़ी संख्या में नगरवासी मौके पर पहुंच गए। सड़क चौड़ीकरण को लेकर लोग विकास की जरूरत से सहमत दिखे, लेकिन हादसे में संविदाकर्मी की मौत और वर्षों पुराने आस्था स्थल के ध्वस्त होने से माहौल गमगीन हो गया। प्रशासन ने ध्वस्तीकरण से पहले मंदिर की प्रतिमाओं को वैदिक रीति-रिवाज से सुभाष पार्क के समीप नवनिर्मित मां काली मंदिर में स्थापित कराया था। इसके बाद पुराने मंदिर को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। ब्रिटिश शासनकाल से जीटी रोड के मध्य स्थित यह मंदिर नगर की प्रमुख धार्मिक पहचान था। यहां नियमित पूजा-अर्चना, हवन, भंडारा और धार्मिक आयोजन होते थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *