पश्चिम बंगाल में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र (Green Cover) को वापस लौटाने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। मंगलवार को Aranya Saptaha/वन सप्ताह के शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री सुवेंदु  अधिकारी ने स्कूली बच्चों को पौधे सौंपकर और खुद वृक्षारोपण कर इस महा-अभियान की शुरुआत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जहां एक तरफ राज्य के नव नियुक्त वन मंत्री मनोज उरांव के नेतृत्व पर भरोसा जताया, वहीं दूसरी तरफ पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में जंगलों की अंधाधुंध कटाई और पर्यावरण की अनदेखी को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया।कार्यक्रम में विधाननगर के विधायक व स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी, वन राज्य मंत्री दिवाकर घरामी, मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल और वन विभाग के प्रधान सचिव मनीष जैन सहित प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। मंच से बोलते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु  अधिकारी ने राज्य में अवैध निर्माण और जंगलों के सफाए पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा: “आज हमारे चारों तरफ सिर्फ कंक्रीट के जंगल खड़े हो रहे हैं। नियमों के मुताबिक किसी भी बिल्डिंग प्लान को मंजूरी देते समय दो-तिहाई निर्माण और एक-तिहाई हिस्सा हरियाली के लिए छोड़ना अनिवार्य है, लेकिन धरातल पर कोई भी इस नियम का पालन नहीं कर रहा है।” मुख्यमंत्री ने अपने हवाई दौरों का अनुभव साझा करते हुए कहा कि हेलीकॉप्टर से नीचे देखने पर आज डर लगता है। झारग्राम, बांकुड़ा, पुरुलिया जैसे जंगलमहल के इलाके हों या फिर उत्तर बंगाल के तराई-डुअर्स और जल्दापाड़ा के घने जंगल, हर जगह अवैध कटाई की गई और पिछली सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। मुख्यमंत्री ने अपने पुराने प्रशासनिक अनुभवों को साझा करते हुए सख्त हिदायत दी कि केवल फोटो खिंचवाने के लिए पौधे न लगाए जाएं। उन्होंने सभी विभागों को लगाए गए पौधों की कम से कम दो साल तक मॉनिटरिंग और रख-रखाव करने का निर्देश दिया है। सीएम ने बंगाल के सभी जनप्रतिनिधियों को पर्यावरण के क्षेत्र में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Healthy Competition) में शामिल होने का आह्वान किया।  मुख्यमंत्री सुवेंदु  अधिकारी ने वन विभाग को पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए तीन बड़े प्रशासनिक सुधारों की घोषणा की:

1. पुलिस भर्ती बोर्ड (PRB) से पारदर्शी नियुक्तियां: वन विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को जल्द भरा जाएगा। धांधली रोकने के लिए अब वनकर्मियों की भर्ती पुलिस रिक्रूटमेंट बोर्ड (PRB) के माध्यम से की जाएगी।

2. सहानुभूति के आधार पर नौकरी (Compassionate Ground): ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले वनकर्मियों के परिजनों को जल्द से जल्द अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने के लिए मुख्य सचिव को फाइलों का त्वरित निपटारा करने का निर्देश दिया गया है।

3. लकड़ी तस्करों पर पुलिसिया कार्रवाई: जिस तरह राज्य में कोयला, बालू और मवेशी तस्करी पर नकेल कसी गई है, ठीक उसी तरह जंगलों से अवैध पेड़ काटने और अवैध आरा मिलों (Saw Mills) को बंद करने के लिए वन विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से बड़ा अभियान चलाएगी।

हाथियों के हमलों से होने वाले जान-माल के नुकसान और वन्यजीव संरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी ‘डबल इंजन’ सरकार ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सफल मॉडलों का अध्ययन कर उसे बंगाल में लागू करेगी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि बीते 15 वर्षों से उपेक्षित पड़े वन विभाग को देश के सबसे बेहतरीन और आधुनिक विभागों में से एक बनाया जाएगा।

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