प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा सुधारों को लेकर सरकार लगातार सक्रिय नज़र आ रही है। हाल ही में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं और पूर्व केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपी गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर जारी अपने वीडियो संदेश में परीक्षा सुधारों के लिए हाई-पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की। इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता इन्फोसिस के सह-संस्थापक और प्रख्यात तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी करेंगे। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है और कई आरोपी जेल में हैं। सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था कर चुकी है और संसद में पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानूनी प्रावधानों वाला नया कानून भी लाने जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से यह हाई-पावर टास्क फोर्स गठित की गई है। इसकी सिफारिशों के आधार पर परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएंगे। नंदन नीलेकणी देश के जाने-माने उद्योगपति और इन्फोसिस के सह-संस्थापक हैं। वे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पहले अध्यक्ष भी रह चुके हैं और आधार परियोजना को सफलतापूर्वक लागू कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल इंडिया मिशन को आगे बढ़ाने में भी उनका बड़ा योगदान माना जाता है। सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए 27 जुलाई 2026 को संसद में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026  पेश करेगी। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस विधेयक को सदन में प्रस्तुत करेंगे। सरकार की ओर से इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET UG पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन हुए थे। छात्रों से कई दौर की बातचीत के बाद सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार का फैसला लिया। इसी क्रम में शिक्षा मंत्रालय में बदलाव किए गए और अब सरकार नई परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

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