पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग शांति से निबट गई है, लेकिन दूसरे चरण से ठीक पहले चुनाव आयोग ने एक ऐसा दांव चला है, जिसने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के खेमे में खलबली मचा दी है. चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए इस बार सिर्फ केंद्रीय बलों पर ही भरोसा नहीं किया है, बल्कि योगी आदित्यनाथ जी के राज्य उत्तर प्रदेश से सीधे एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट को बंगाल के चुनावी मैदान में उतार दिया है. नाम है आईपीएस अजय पाल शर्मा जी. यूपी में इनकी पहचान ‘सिंघम’ की है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि चुनाव आयोग ने उन्हें उस दक्षिण 24 परगना जिले का पुलिस आब्जर्वर बनाकर भेजा है, जो सीधे तौर पर टीएमसी के नंबर 2 नेता और ममता बनर्जी जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी जी का अभेद्य किला माना जाता है. राज्य में 23 अप्रैल को पहले चरण का चुनाव हुआ था. कुल 152 विधानसभा क्षेत्रों में छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें, तो मतदान काफी हद तक सुचारू और शांतिपूर्ण रहा. अब बारी दूसरे चरण की है. 29 अप्रैल को कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल की 142 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे. इस चरण को लेकर चुनाव आयोग कोई रिस्क नहीं लेना चाहता. इलाके की संवेदनशीलता को देखते हुए आयोग ने 11 नए पुलिस पर्यवेक्षकों की एक लिस्ट जारी की है. लेकिन इस लिस्ट ने बंगाल के सियासी गलियारों में सबको चौंका दिया है, क्योंकि 11 नामों की इस फेहरिस्त में सबसे पहला नाम यूपी कैडर के तेजतर्रार आईपीएस अफसर अजय पाल शर्मा जी का है. अजय पाल शर्मा जी यूपी पुलिस का वो चेहरा हैं, जो अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने के लिए जाने जाते हैं. यूपी में तैनाती के दौरान उन्होंने दर्जनों अपराधियों का एनकाउंटर किया है और कई खूंखार बदमाशों को सलाखों के पीछे पहुंचाया है. अपनी फिट बॉडी, आंखों पर काला चश्मा और ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली पुलिसिंग के कारण उन्हें यूपी का ‘सिंघम’ कहा जाता है. उनका नाम ही स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था को सख्त करने का एक बड़ा मनोवैज्ञानिक हथियार माना जाता है. चुनाव आयोग ने अजय पाल शर्मा जी को दक्षिण 24 परगना का पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. यह कोई आम जिला नहीं है. यह टीएमसी का सबसे मजबूत गढ़ है और राजनीतिक रूप से इसे अभिषेक बनर्जी जी का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है. बंगाल चुनावों के इतिहास में इस इलाके में अक्सर हिंसक झड़पें, बूथ कैप्चरिंग की कोशिशें और राजनीतिक बवाल देखने को मिलते रहे हैं. ऐसे में यहां एक ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ को बिठाने का सीधा संदेश यह है कि चुनाव आयोग इस बार किसी भी तरह की धांधली या हिंसा से सख्ती से निपटेगा. पुलिस पर्यवेक्षक के तौर पर शर्मा जी के पास स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती और उन पर नियंत्रण का सीधा अधिकार होगा. इतने हाई-प्रोफाइल और सख्त अफसर की दक्षिण 24 परगना में तैनाती से टीएमसी बुरी तरह भड़क गई है. पार्टी नेताओं ने चुनाव आयोग की मंशा पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं. टीएमसी ने सवाल किया क्या चुनाव आयोग को यह लगता है कि दक्षिण 24 परगना के चुनावों में इतनी ज्यादा अशांति होगी कि वहां एनकाउंटरों की जरूरत पड़ जाएगी? चुनाव शांतिपूर्ण कराने हैं या एनकाउंटर स्पेशलिस्ट भेजकर स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं में खौफ पैदा करना है? टीएमसी इसे अपने गढ़ में कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ने और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी साजिश के रूप में देख रही है.
