पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद अखिलेश यादव जी बंगाल पहुंचे हैं। वहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी जी से मुलाकात की। बंगाल में 15 साल पुराने टीएमसी शासन के खात्मे और भाजपा की प्रचंड जीत के बाद यह पहली मुलाकात है। इस दौरान अखिलेश ने कहा कि भाजपा को दीदी हमेशा से खटकती रही है। अखिलेश का मानना है कि भले ही इस बार आंकड़े पक्ष में न रहे हों, लेकिन ममता बनर्जी ने एक योद्धा की तरह मुकाबला किया है। ममता बनर्जी खुद अखिलेश यादव जी को रिसीव करने के लिए गेट तक आईं, जबकि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी जी ने अखिलेश जी को गले लगाकर उनका स्वागत किया। इस मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव जी ने ममता बनर्जी जी को शॉल ओढ़ाकर उनका सम्मान किया और कहा, दीदी, आप हारी नहीं हैं। अखिलेश जी ने ममता बनर्जी जी और अभिषेक बनर्जी जी के हौसले की तारीफ करते हुए कहा कि आप लोगों ने जिस तरह से चुनाव लड़ा, वह वाकई काबिले तारीफ है। मीडिया से बातचीत में अखिलेश ने कहा, भाजपा की आंखों में दीदी खटकती हैं, क्योंकि वह आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं। भाजपा सामंती सोच की है, इनके संगी साथी पुरुषवादी लोग हैं। ये लोग नारी को बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते हैं। मैंने इस चुनाव को बहुत करीब से देखा। जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल हुआ और भाजपा का जो रवैया था, वो हैरान करने वाला है। भाजपा ने बंगाल में जो किया, यूपी में उससे कम किया था। बंगाल में उसका ट्रायल किया गया। उन्होंने कहा, भाजपा जिस तरह से काम करती है, उससे अराजकता फैलती है। चुनाव के बाद कहा गया कि सुरक्षाबलों की कई कंपनियां यहां रहेंगी। सिक्योरिटी संभालेंगी। अब वे कंपनियां कहां हैं? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी जी से मुलाकात के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव जी ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला। अखिलेश यादव जी ने बंगाल चुनाव के नतीजों और चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के झूठ ‘सोन पपड़ी’ की तरह हैं, जहां एक के ऊपर एक झूठ की परतें जमाई जाती हैं। अखिलेश यादव जी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को सीधे कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने चुनाव के दौरान हुई हिंसा और धांधली के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया। अखिलेश जी ने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है और वह भाजपा के साथ मिलकर काम कर रहा है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि आयोग ‘मर’ चुका है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के कुंदरकी और रामपुर उपचुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां वोटरों को डराया गया और पोलिंग एजेंटों को बाहर निकाल दिया गया। इस दौरान उन्होंने चुनौती दी कि अगर चुनाव आयोग निष्पक्ष है, तो कुंदरकी और बंगाल की वोटिंग व गिनती के सीसीटीवी फुटेज जनता को दिखाए जाएं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही लाइव हो सकती है, तो चुनाव की क्यों नहीं? अखिलेश जी ने कहा कि कुंदरकी में जहां सपा का वोट बैंक हमेशा मजबूत रहा, वहां भाजपा का वोट प्रतिशत अचानक 77% कैसे पहुँच गया? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय बलों की मदद से जबरन वोट डलवाए गए और पूरी चुनाव प्रक्रिया को ही बदल दिया गया। सपा प्रमुख ने कहा कि अगर गोलियों के डर से वोट डलवाए जाएंगे, तो लोकतंत्र में जीत किसकी होगी? उन्होंने बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के करीबी की हत्या के लिए सीधे गृह मंत्री अमित शाह जी को जिम्मेदार ठहराया। अखिलेश यादव जी ने कहा कि भाजपा उनसे और उनकी पार्टी से नाराज है क्योंकि उन्होंने चुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त दी है।उन्होंने कहा कि हमने दो गलतियाँ कीं; एक तो भाजपा को हराया और दूसरा उन्हें अयोध्या में हराया। इसलिए हमें और हमारे साथियों को अब निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में उन्होंने और उनके सांसदों ने लोकसभा में ‘कफन’ तक ले जाने का फैसला किया था ताकि अपनी नाराजगी दर्ज करा सकें। राहुल गांधी जी ने चुनावी नतीजों के तुरंत बाद ममता बनर्जी जी से बात की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि सांप्रदायिकता के खिलाफ अब हम सभी को मिलकर लड़ना होगा। राहुल जी ने दीदी से अपील की कि देश की सेक्युलर ताकतों को अब एक मंच पर मजबूती के साथ आने की जरूरत है। राहुल गांधी जी की इन बातों का जवाब देते हुए ममता बनर्जी जी ने अपनी नाराजगी जाहिर की और आरोप लगाया कि इस चुनाव में केंद्रीय एजेंसियों और चुनाव आयोग का जमकर दुरुपयोग किया गया है, जिसके कारण नतीजे ऐसे रहे हैं। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भाजपा ने राज्य में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 207 सीटों पर कब्जा जमाया है। इस जीत के साथ ही भाजपा ने दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर लिया है और बंगाल में टीएमसी के 15 साल के राज को खत्म कर दिया है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी की पार्टी महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई है। इस हार के बाद ममता बनर्जी जी ने अब अपनी पूरी ताकत ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने में लगाने का संकल्प लिया है।
