बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भतीजी ब्रिष्टी मुखर्जी ने मंगलवार को बीरभूम के कुसुम्बा गांव में सुसाइड कर लिया। ब्रिष्टि, ममता के चचेरे भाई और तृणमूल नेता निहार मुखर्जी की बेटी थीं। वृष्टि मुखर्जी का शव उनके ही घर की दूसरी मंजिल के बरामदे में कपड़े के फंदे से लटकता हुआ पाया गया। घटना की सूचना मिलते ही रामपुरहाट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल भेज दिया। प्राथमिक दृष्टि में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मानकर जांच शुरू कर चुकी है। वृष्टि मुखर्जी स्थाबोलपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में ग्रुप-सी (Group C) कर्मचारी के रूप में कार्यरत थीं। पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर उनका नाम आया था। जांच में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार, उनके OMR शीट में भारी गड़बड़ी पाई गई थी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ी थी। इसके बाद से ही वे डिप्रेशन में थीं। परिवार के सदस्यों के अनुसार, वृष्टि पिछले 4-5 वर्षों से गंभीर मानसिक अवसाद (Depression) से जूझ रही थीं और उनका इलाज चल रहा था। नौकरी चले जाने के अलावा, हाल के दिनों में उनका तलाक (Divorce) का मामला भी अदालत में चल रहा था, जिसके कारण वह काफी हताश रहती थीं। परिजनों का कहना है कि वह अधिकतर समय अपने कमरे में ही खुद को बंद रखती थीं और किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करती थीं। मंगलवार सुबह तक वृष्टि को घर में देखा गया था, लेकिन दोपहर के समय परिजनों ने उन्हें घर की दूसरी मंजिल के बरामदे में गले में कपड़ा डाले फंदे से लटकते हुए देखा। घटना के बाद से ही कुसुमबा गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह कदम किसी तात्कालिक दबाव में उठाया गया या वजह कुछ और थी। रामपुरहाट थाना पुलिस का कहना है कि मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर सभी पहलुओं से मामले की गहनता से जांच की जा रही है। शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल, 2024 को अवैध रूप से प्राप्त सभी नौकरियां रद्द कर दी थीं। इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया था कि जो लोग लंबे समय से अवैध तरीके से काम कर रहे हैं, उन्हें ब्याज समेत सैलरी लौटानी होगी। इस फैसले के तहत 25,753 नौकरियां रद्द कर दी गईं थीं, जिन्हें 2016 के पैनल में नौकरी मिली थी।
