तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी को सेबाश्रय हेल्थ कैंप से जुड़े मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट से फिलहाल बड़ी राहत मिली है। सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य पुलिस को 30 नवंबर तक उनके खिलाफ किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस अभिषेक बनर्जी को नोटिस जारी कर सकती है। साथ ही, टीएमसी सांसद को जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने की।सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के सामने दावा किया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं और इन्हीं शिकायतों के आधार पर एफआईआर का सिलसिला आगे बढ़ रहा है। वकील ने बताया कि अब तक अभिषेक बनर्जी से संबंधित 16 शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इनमें से सात शिकायतें बीजेपी नेता अभिजीत दास की ओर से की गई हैं। अभिजीत दास ने जुलाई से अभिषेक बनर्जी समेत कई लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई हैं। इन शिकायतों में वर्ष 2025 में शुरू किए गए सेबाश्रय हेल्थ कैंपों को लेकर कथित अनियमितताओं और मेडिकल लापरवाही जैसे आरोप लगाए गए हैं। सोमवार को हाई कोर्ट के सामने जिस एफआईआर को लेकर सुनवाई हुई, उसमें सेबाश्रय हेल्थ कैंपों में कथित तौर पर नकली दवाओं के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। अभिषेक बनर्जी की ओर से दलील दी गई कि लगातार शिकायतों के जरिए उन्हें अलग-अलग मामलों से जोड़ा जा रहा है। इसके बाद अदालत ने शिकायतों की प्रकृति और उनमें अभिषेक बनर्जी की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर सवाल किया कि यदि जांच में अभी तक अभिषेक बनर्जी की प्रत्यक्ष भूमिका सामने नहीं आई है, तो उन्हें आरोपों से किस आधार पर जोड़ा जा रहा है। अदालत ने कहा कि उसने व्यक्तिगत रूप से तीन शिकायतों को देखा है और उनमें से किसी का भी सीधे तौर पर याचिकाकर्ता से संबंध दिखाई नहीं देता। पीठ ने जांच एजेंसी से जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि मामले में अभिषेक बनर्जी की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नजर नहीं आती। इसी क्रम में पीठ ने सवाल किया कि क्या अभिषेक बनर्जी ने संबंधित दवाएं लिखी थीं। राज्य सरकार की ओर से पेश वकीलों ने शिकायतकर्ता अभिजीत दास को ‘व्हिसलब्लोअर’ बताया। इस पर भी अदालत ने सवाल उठाया। पीठ ने पूछा कि यदि शिकायतकर्ता को मामले में व्हिसलब्लोअर के तौर पर देखा जा रहा है, तो संबंधित मुद्दे को पहले क्यों नहीं उठाया गया। अदालत ने सवाल किया कि शिकायत लगभग एक साल बाद क्यों सामने आई। इस टिप्पणी के जरिए पीठ ने शिकायतों के समय और उनके लगातार दर्ज होने के पैटर्न को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता अभिजीत दास की राजनीतिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। पीठ ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि अभिजीत दास लोकसभा चुनाव में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं। अभिजीत दास ने 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में डायमंड हार्बर सीट से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। दोनों चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अदालत ने लगातार उन्हीं की ओर से शिकायतें आने के संदर्भ में इस राजनीतिक पृष्ठभूमि का जिक्र किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी को हाई कोर्ट से मिली इसी तरह की राहत का भी उल्लेख किया। पीठ ने संकेत दिया कि अभिषेक बनर्जी के मामले में भी उसी आदेश को आधार बनाकर राहत दी जा सकती है। अदालत की टिप्पणी से साफ हुआ कि फिलहाल याचिकाकर्ता के खिलाफ सीधे कठोर कार्रवाई के बजाय जांच को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक 30 नवंबर तक राज्य पुलिस अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठा सकेगी। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि जांच पर रोक लगा दी गई है। पुलिस आवश्यकता पड़ने पर उन्हें जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेज सकती है। अदालत ने अभिषेक बनर्जी को भी जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। अभिषेक बनर्जी फिलहाल आंखों के इलाज के लिए अमेरिका में हैं। हाई कोर्ट ने उन्हें चिकित्सा उपचार के लिए देश से बाहर जाने की अनुमति दी है। ऐसे में अदालत की ओर से दी गई मौजूदा राहत के बीच पुलिस की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और अभिषेक बनर्जी को आगे कौन-से नोटिस जारी होते हैं, इस पर नजर बनी रहेगी।

By UJAGAR

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