सुप्रीम कोर्ट को मंगलवार को बताया गया कि उसके पहले के निर्देशों के मुताबिक, स्नातकोत्तर प्रवेश (पोस्टग्रेजुएट एडमिशन) के लिए राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) की समीक्षा करने के लिए 12 सदस्यों वाली एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है. यह मामला जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच के सामने आया. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने केंद्र की तरफ से और वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद और वकील सत्यम सिंह ने याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन और अन्य की तरफ से केस लड़ा. सुनवाई के दौरान, भाटी ने स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS), स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी एक ऑफिस ऑर्डर रिकॉर्ड पर लाया. आदेश के मुताबिक, डीजीएचएस डी लवनीश जी कृष्णा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है, जिसमें असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल (ME) डॉ. प्रवीण कुमार दास सदस्य सचिव हैं. कमिटी में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) के प्रतिनिधियों के अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय के दूसरे अधिकारी भी शामिल हैं. अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को शामिल करते हुए नीट एग्जाम के जरिए मौजूदा प्रवेश प्रणाली का पूरा ऑडिट करने के लिए एक तंत्र बनाना, मौजूदा सिस्टम में कमियों की पहचान करना और उनके लिए व्यावहारिक और लागू करने लायक समाधान ढूंढना. भाटी ने कहा कि, स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगने के बाद कमेटी को अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए 8 हफ्ते का समय चाहिए होगा. बेंच ने कमेटी को स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगने और 8 हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया. बेंच नीट-पीजी 2025 परीक्षा के लिए क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल कम करने के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी. याचिका में NBEMS द्वारा 13 जनवरी को जारी किए गए नोटिस को चुनौती दी गई थी, जिसमें क्वालिफाइंग कट-ऑफ पर्सेंटाइल कम किए गए थे. 13 जनवरी, 2026 को जारी नोटिस में अलग-अलग कैटेगरी के लिए नीट-पीजी 2025-26 के तीसरे राउंड की काउंसलिंग के लिए मिनिमम क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल कट-ऑफ कम कर दिया गया था.
