प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिक्षकों से छात्रों में नशे की लत को लेकर सतर्क रहने और खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों एवं रचनात्मक कार्यों के जरिए बच्चों का ‘स्क्रीन टाइम’ (मोबाइल फोन और अन्य स्क्रीन पर बिताया जाने वाला समय) कम करने में मदद करने की अपील की है। मोदी ने शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से बातचीत के दौरान उनसे बच्चों के बचपन को बनाए रखने और उनकी स्वाभाविक जिज्ञासा को प्रोत्साहित करने को कहा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को कक्षा में पढ़ाई को अधिक रोचक बनाने के लिए रचनात्मक तरीकों को एक-दूसरे के साथ साझा करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षकों को बच्चों के शैक्षणिक प्रदर्शन से आगे बढ़कर उनके व्यवहार और रोजमर्रा के जीवन पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवारों की संख्या में कमी आने के कारण बच्चों के जीवन में शिक्षकों की भूमिका अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। मोदी ने नशे की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ बड़े शहरों और विश्वविद्यालयों में यह पता लगाना मुश्किल होता है कि कोई इसकी चपेट में आ गया है या नहीं, क्योंकि यह पता ही नहीं चलता कि कौन किसे क्या दे रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी परिस्थितियों में शिक्षकों को जागरूकता फैलाने की पहल करनी चाहिए और यदि किसी बच्चे (के व्यवहार) में कोई बदलाव दिखाई दे तो उस पर भी बारीकी से नजर रखनी चाहिए।’’ प्रधानमंत्री के लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर हुई इस बातचीत का वीडियो शनिवार को जारी किया गया। मोदी ने कहा कि शिक्षकों को किताबों और पाठ्यक्रम से आगे बढ़कर छात्रों के जीवन से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘आपको किसी छात्र के बचपन को खत्म नहीं होने देना चाहिए। छात्रों के जीवन में बचपन को जीवंत बनाए रखने में शिक्षक सबसे बड़ा योगदान दे सकते हैं।’’ मोदी ने इस बारे में भी बात की कि शिक्षक छात्रों को लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से कैसे दूर रख सकते हैं और उन्हें खुले में खेलकूद के लिए कैसे प्रेरित कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों की बुनियादी प्रवृत्ति एवं जिज्ञासा एक जैसी होती है और यदि शिक्षक इस जिज्ञासा को प्रोत्साहित कर सही दिशा दें तो वे उनके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों का बढ़ता ‘स्क्रीन टाइम’ बड़ी चिंता बन गया है। उन्होंने शिक्षकों से अभिभावकों से इस बारे में बात करने को कहा कि उनके बच्चे स्क्रीन पर कितना समय बिताते हैं और क्या वे देर रात तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते रहते हैं। मोदी ने कहा कि बच्चों में खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों के प्रति रुचि पैदा करके उनका ‘स्क्रीन टाइम’ स्वाभाविक रूप से कम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए बच्चों को कक्षा से बाहर ले जाने और उन्हें वास्तविक जीवन से जुड़े कौशल तथा विभिन्न प्रकार के कामकाज से परिचित कराने के महत्व पर जोर दिया। मोदी ने एक शिक्षिका की सराहना की जिन्होंने अपने आसपास की महिलाओं को स्तन कैंसर के प्रति जागरूक करने के बारे में बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने अपने लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में भी स्तन कैंसर को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अधिक से अधिक महिलाएं स्तन कैंसर की जांच के लिए आगे आ रही हैं और इस मामले में गिनीज विश्व रिकॉर्ड भी बना है।’’ इस वर्ष तीन विभागों से 82 शिक्षकों और शिक्षाविदों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। इनमें विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के 48 शिक्षक, उच्च शिक्षण संस्थानों एवं पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षक/संकाय सदस्य और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के 13 कौशल प्रशिक्षक शामिल हैं।

By UJAGAR

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