भाजपा ने चुनाव से पहले बंगाल की माताओं-बहनों से जो वादा किया था, उसे सरकार गठन के तत्काल बाद अमलीजामा पहना दिया गया है। बुधवार को राज्य कबैनिटे की बैठक है। जिसमें शपथ लेने वाले 35 नए मंत्रियों को विभाग आवंटित किया जाएगा। इसके बाद ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना की पहली किस्त के रूप में 3,000 रुपये योग्य महिला लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजने की विधिवत शुरुआत की जाएगी। सोमवार को ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि महिलाओं को सरकारी बसों में फ्री यात्र सेवा की शुरुआत हो चुकी है और 3000 रुपये देने की योजना की शुरुआत बुधवार को होगी। इससे पहले मंगलवार तारकेश्वर धाम में बाबा तारकनाथ के चरणों में माथा टेकने के बाद एक बार फिर मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना की पहली किस्त लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचने शुरू हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने योजना को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को खारिज करते हुए महिलाओं से सहयोग की अपील की थी। उन्होंने सोमवार को कहा था कि जब आप 20 रुपये के भिंडी खरीदने जाते हैं, तब भी उसे दबाकर जांचते हैं। यहां सरकार साल में 36,000 रुपये देने जा रही है, तो क्या स्क्रूटनी और जांच नहीं होगी? थोड़ा धैर्य रखें। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि ‘लक्ष्मी भंडार’ के नाम पर जो 30 लाख फर्जी खाते बनाकर तृणमूल नेताओं ने लूट मचाई थी, उन्हें पूरी तरह ब्लॉक किया जा रहा है। घुसपैठियों और फर्जी लाभार्थियों को एक भी रुपये नहीं दिया जाएगा, बल्कि उन पर वित्तीय धोखाधड़ी का मुकदमा चलेगा। अन्नपूर्णा भंडार योजना को लेकर कोलकाता नगर निगम में बेहद दिलचस्प राजनीतिक नजारा देखने को मिल रहा है। कोलकाता के कुल 137 तृणमूल पार्षदों में से लगभग 60 पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों में इस सरकारी योजना के फॉर्म बांटने और महिलाओं की मदद करने की कमान खुद संभाल ली है। भवानीपुर के वार्ड नंबर 70 में खुद मेयर परिषद असीम बसु कैंप लगाकर महिलाओं को फॉर्म भरने में ‘गाइड’ करते दिखे। तृणमूल पार्षदों का कहना है कि यह जनता के जनादेश का सम्मान है और नागरिकों को सेवा पहुंचाना उनका लोकतांत्रिक कर्तव्य है। हालांकि,भाजपा ने इस पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि चुनाव में करारी हार के बाद जनाक्रोश से बचने के लिए तृणमूल नेता अब भाजपा सरकार की इस लोकप्रिय योजना को ढाल बना रहे हैं। बहरहाल, निगम आयुक्त स्मिता पांडे की मुस्तैदी से कोलकाता के सभी 144 वार्डों में आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से फार्म भरने का काम युद्धस्तर पर जारी है।

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