कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार ने बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की कमान संभाल ली. वहीं, डॉ. जी परमेश्वर ने राज्य के उपमुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की. इसके अलावा 12 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली जिसमें, केएच मुनियप्पा, केजे जॉर्ज, एमबी पाटिल, रामलिंगारेड्डी, सतीश जराकिहोली, कृष्णबैरे गौड़ा, प्रियांक खड़गे, यूटी खादर, ईश्वर खंड्रे, यतींद्र सिद्धारमैया, बैराती सुरेश और शरणप्रकाश पाटिल शामिल हैं. बेंगलुरु स्थित लोक भवन के ग्लास हाउस में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने दोनों नेताओं को शपथ दिलाई. इस अवसर पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. मुख्यमंत्री पद की शपथ के साथ ही डी.के. शिवकुमार का वर्षों पुराना राजनीतिक सपना पूरा हो गया. आठ बार विधायक रह चुके शिवकुमार लंबे समय से राज्य की सर्वोच्च कुर्सी तक पहुंचने के लिए प्रयासरत थे. कर्नाटक की राजनीति में शिवकुमार और सिद्धरमैया के बीच नेतृत्व को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी. इस अध्याय का अंत तब हुआ जब कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर सिद्धरमैया ने 28 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. सिद्धरमैया के पद छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री पद का रास्ता साफ हो गया और कांग्रेस के संकटमोचक माने जाने वाले डीके शिवकुमार को राज्य की बागडोर सौंप दी गई. उनके नेतृत्व में कांग्रेस अब कर्नाटक में नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत कर रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सिद्धारमैया को कांग्रेस कार्य समिति यानी CWC का सदस्य बनाकर बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है. पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि सिद्धारमैया खुद को पूरी तरह अलग-थलग महसूस करें. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम उन्हें सम्मानजनक भूमिका देने और पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है. इससे एक तरफ सिद्धारमैया खेमे को संदेश गया है, वहीं दूसरी तरफ डीके शिवकुमार को भी स्पष्ट संकेत मिला है कि पार्टी नेतृत्व दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखना चाहता है.
