निकाला गया। इसके बाद उन्हें आसपास के सुरक्षित अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सुबह करीब तीन बजे आग लगने की सूचना प्राप्त हुई थी। जब दमकल की टीम अस्पताल पहुंची तो आईसीयू वार्ड पूरी तरह धुएं से भरा हुआ था। बचाव अभियान के दौरान कई मरीजों को गंभीर स्थिति में बाहर निकाला गया। अधिकारियों का कहना है कि राहत कार्य के दौरान 20 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया, हालांकि कई मरीजों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने अस्पताल परिसर को अपने कब्जे में लेकर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस दर्दनाक हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतकों और घायलों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। कई परिजनों का कहना है कि आग लगने के बाद अस्पताल के चिकित्सक और कर्मचारी मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर वहां से चले गए। इससे कई मरीज समय पर सहायता नहीं मिलने के कारण गंभीर स्थिति में पहुंच गए। एक पीड़ित स्वजन ने बताया कि उनके पिता आईसीयू में भर्ती थे और आग लगने के बाद उन्हें बाहर निकालने में काफी देर हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की मदद नहीं की गई। परिजनों का यह भी कहना है कि हादसे के बाद मृतकों के शवों की जानकारी देने में भी अस्पताल प्रबंधन ने सहयोग नहीं किया। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है। मृतकों की संख्या और हादसे के वास्तविक कारणों को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। DM सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि 13 बेड लगे हुए थे, जिनमें 15 मरीज भर्ती थे। अभी 3 मरीजों के मरने की पुष्टि हुई है। आग की घटना के चलते ICU वार्ड के इंचार्ज भी झुलस गए हैं, जिन्हें बगल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बाकी मरीजों का भी रेस्क्यू कर आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। बीपी लो होने के बाद एक बुजर्ग महिला को इसी ICU वार्ड में भर्ती कराया गया था। आग लगने की घटना के बीच महिला ने न सिर्फ अपनी जान बचाई, बल्कि गार्ड को भी घटना के बारे में बताया। डीएम ने मरीजों के स्वजनों से बात की। इस दौरान मरीजों ने अस्पताल की अव्यवस्था के बारे में शिकायत की। मरीजों के स्वजनों ने बताया कि अस्पताल में फायर कंट्रोल सिस्टम काम नहीं कर रहा था। एक स्वजन ने बताया कि सीढ़ी का गेट बंद था, जिसकी वजह से लोगों को नहीं बचाया जा सका। उनका कहना है कि अस्पताल अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है।
इन मरीजों की हुई मौत
- शशांक कुमार, औराई, मुजफ्फरपुर
- गीता देवी, मोतीपुर, मुजफ्फरपुर
- उदय कुमार, तरियानी, शिवहर
- कृष्ण नंदन
- चंचला कुमारी
विशंभरपुर शिवहर के रहने वाले उदय कुमार चार दिन से अस्पताल में भर्ती थे। ब्रेन सर्जरी होने के बाद आईसीयू में थे। इनसे मिलने पत्नी नीलू देवी, सास बच्ची देवी, बेटा सत्यम, बेटी आकांक्षा अस्पताल में थीं। साला नीतीश भी था। सभी लोग साथ में थे। शोर होने पर जानकारी मिली, लेकिन जब तक पहुंचे, तब तक उदय कुमार की मौत हो चुकी थी। दिस्तौलिया, कथैया की रहने वाली गीता देवी एक जून को भर्ती हुई थीं। शुगर और बीपी से ग्रसित थीं। उनका डायलिसिस चल रहा था। ये जानकारी उनके बेटे अनीश ठाकुर ने दी। गोरिगमा डीह, मीनापुर के रहने वाले कृष्णनंदन सिंह डॉ. संजीव के यूनिट में इलाजरत थे। फेफड़ा में पानी था। 22 मई से भर्ती थे।
