गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी और अजमल गुज्जर द्वारा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित अंतरराष्ट्रीय आतंकी मॉड्यूल का दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भंडाफोड़ कर गिरोह के सात आतंकियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आतंकी फरार है। यह सिंडिकेट पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते दिल्ली समेत एनसीआर में अवैध हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल था। स्पेशल सेल के उपायुक्त नारा चैतन्य के अनुसार, पुलिस टीम उन आतंकी नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रख रही है, जो देश में स्लीपर मॉड्यूल के जरिये काम कर रहे हैं। अलग-अलग ऑपरेशन के दौरान मिली सूचनाओं से पता चला कि संगठित आतंकी इकोसिस्टम तेजी से उभर रहा है, जिसे पाकिस्तान में रहने वाला गैंगस्टर से आतंकी बना शहजाद भट्टी संचालित कर रहा है। वहीं, बीते माह खुफिया जानकारी मिली कि शहजाद भट्टी, अजमल गुज्जर के साथ मिलकर आईएसआई के कहने पर सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिये भर्ती किए गए युवाओं के माध्यम से दिल्ली समेत एनसीआर में हमले की योजना बना रहा है। इस जानकारी पर कार्रवाई करते हुए एसीपी कैलाश सिंह बिष्ट की देखरेख में और इंस्पेक्टर राहुल कुमार, विनीत कुमार तेवतिया और अजीत कुमार के नेतृत्व में गठित टीम ने गाजियाबाद जिले के लोनी क्षेत्र से एक युवक मोहित उर्फ योगी को दिल्ली में यमुना विहार से दबोचा। उसे अजमल ने भर्ती किया था। पुलिस ने उसके पास से एक पिस्टल, चार कारतूस और एक मोबाइल बरामद हुआ, जिसमें अजमल के साथ आपत्तिजनक बातचीत थी। इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों अनस उर्फ अनस त्यागी, दीपक अग्रौला, आरिफ उर्फ प्रधान, करणवीर सिंह, जतन और साबिर को गिरफ्तार किया गया, जबकि एक आतंकी आमिर फरार होने में सफल रहा। इनके कब्जे से चार सेमी-आटोमेटिक पिस्टल, 37 कारतूस, आपत्तिजनक डिजिटल सुबूत और एक स्कॉर्पियो गाड़ी बरामद की गई। इनमें से कई आरोपी हत्या, डकैती, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के मामलों में पहले से शामिल रहे हैं। इनमें से अनस, आरिफ और करण को शहजाद और अजमल ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म और एन्क्रिप्टेड एप्स के जरिये भर्ती किया था, जबकि शेष को मोहित और इन तीनों ने भर्ती किया। अनस ने गैंगस्टर दीपक अग्रौला का परिचय अजमल से कराया, जिसके बाद दीपक ने अपने साथियों की मदद से अवैध हथियारों की खेप हासिल की। इन सभी का काम पाकिस्तान से ड्रोन के जरिये तस्करी कर लाए गए नशीले पदार्थों और अवैध हथियारों की तस्करी और वितरण में मदद करना और बाद में उन्हें दिल्ली समेत एनसीआर में सप्लाई करना था, ताकि नियोजित आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया जा सके। अनस से पूछताछ में पता चला कि शहजाद और अजमल ने आरोपितों को सार्वजनिक स्थलों सहित कई स्थानों की रेकी करने का निर्देश दिया था। ऐसी गतिविधियों का मकसद डर पैदा करना और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ना था। आरोपितों ने हमले के उद्देश्य से उन जगहों की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजे थे। भारतीय युवाओं को पैसों का लालच देकर कट्टरपंथी बनाया जाता था और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उकसाया जाता था। ये नेटवर्क एन्क्रिप्टेड एप्स, गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट, हवाला चैनल, स्कैनर-आधारित वित्तीय लेनदेन, डेड-ड्राप डिलीवरी सिस्टम और फोटो/वीडियो-आधारित कन्फर्मेशन सिस्टम के जरिये काम करता था। विदेश में बैठे हैंडलर हथियार और विस्फोटक जुटाने, टारगेट चुनने और हमलों को अंजाम देने से जुड़े निर्देश देते थे। जांच में सामने आया कि मोहित, आरिफ, अनस और फरार आरोपित आमिर जरूरतमंद लोगों को ऊंची ब्याज दरों पर पैसा उधार देते थे और दबदबा बनाने के लिए अवैध हथियार रखते थे। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से उनका संपर्क अजमल और बाद में शहजाद से हुआ। आरिफ ने अजमल से एक लाख रुपये में जिगाना पिस्टल खरीदी, जिसकी भुगतान व्यवस्था दुबई स्थित खातों और यूपीआइ ट्रांजैक्शन के जरिये की गई। इसके बाद गिरोह पंजाब से दिल्ली समेत एनसीआर में हेरोइन तस्करी में शामिल हो गया और गिरफ्तारी से बचने के लिए ड्रोन से किया जाने वाला ‘डेड-ड्राप’ डिलीवरी सिस्टम अपनाया। फरवरी 2026 में आरिफ का साथी हैप्पी ड्रग सप्लाई मामले में पंजाब पुलिस द्वारा पकड़ा गया।
