पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स (PSO) को बुधवार रात अचानक हटा दिया गया। इस घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल है। राज्यसभा में टीएमसी के नेता डेरेकओ’ब्रायन ने एक वीडियो संदेश जारी कर इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बेहद चिंतित और आक्रोशित लहजे में कहा, “बुधवार रात करीब 9:30 बजे ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से उनके पीएसओ को हटा लिया गया। ये वो सुरक्षाकर्मी थे जो पिछले 20 वर्षों से साए की तरह तृणमूल नेत्री के साथ तैनात थे।” डैरेक ओ’ब्रायन ने आगे दावा किया कि इस वक्त ममता बनर्जी के कालीघाट वाले घर पर कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं बची है। स्थिति की गंभीरता और सुरक्षा के प्रति आशंका जताते हुए उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के घर के प्रवेश द्वार (एंट्री गेट) को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने अपनी खुद की गाड़ी को वहां आड़ा खड़ा कर दिया है, ताकि रास्ता ब्लॉक किया जा सके। इस घटना को लेकर टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा: “यह बेहद चिंताजनक है। दीदी के लंबे समय से तैनात सुरक्षाकर्मियों को अचानक क्यों वापस ले लिया गया और क्यों उन्हें देर रात बिना किसी सुरक्षा के छोड़ दिया गया? एक पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, यह पश्चिम बंगाल सरकार की संस्थागत जिम्मेदारी है। बंगाल में इस वक्त प्रतिशोध (बदले) की राजनीति का एक अविश्वसनीय खेल चल रहा है।” ममता बनर्जी का आवास कालीघाट के हरिश चटर्जी स्ट्रीट में स्थित है। जब वह मुख्यमंत्री पद पर थीं, तब इस वीवीआईपी गली के मुहाने पर हमेशा पुलिस के कड़े बैरिकेड्स, सुरक्षाकर्मियों की चौकस नजरें और वाहनों की सख्त चेकिंग एक सामान्य बात थी। लेकिन राज्य की कमान बदलते ही और उनके ‘पूर्व मुख्यमंत्री’ बनते ही पुलिस प्रशासन द्वारा वहां से अतिरिक्त सुरक्षा घेरा और बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं। सुरक्षा हटाए जाने के आरोपों के बीच कोलकाता पुलिस के सूत्रों से बड़ी जानकारी सामने आई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को वर्तमान में ‘जेड प्लस’ (Z+) सुरक्षा मिली हुई है और भविष्य में भी यह सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बहाल रहेगी। गौरतलब है कि ‘जेड-प्लस’ सुरक्षा भारत में किसी भी वीआईपी या वीवीआईपी व्यक्ति को दी जाने वाली सर्वोच्च स्तर की राजकीय सुरक्षा है, जो केवल चरम खतरे का सामना कर रहे देश के शीर्ष राजनेताओं और विशिष्ट हस्तियों को ही प्रदान की जाती है। हालांकि, अचानक पीएसओ के तबादले और सुरक्षा में आए इस बदलाव को लेकर राजनीति गरमा गई है।

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