पंजाब की राजनीति में मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित विवादित वीडियो को लेकर घमासान और तेज हो गया है। मामले में एफआईआर और दो गिरफ्तारियों के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि पूरे मामले को राजनीतिक साजिश के तहत खड़ा किया गया है और असली सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। AAP के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने सीधे तौर पर पूछा है कि आखिर यह वीडियो किसने तैयार कराया, इसमें अभिनय किसने किया, इसके पीछे पैसा किसका लगा और इसे सोशल मीडिया पर फैलाने के लिए जिम्मेदार कौन लोग हैं? चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत करते हुए पंजाब AAP अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने कहा कि हरियाणा में भाजपा की सरकार है और वहां कुछ भी कराया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि एफआईआर की पूरी कहानी मनगढ़ंत और फर्जी है। अमन अरोड़ा ने कहा कि यदि भाजपा सच सामने लाना चाहती है तो उसे केवल गिरफ्तारियां दिखाने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि वीडियो की पूरी साजिश के पीछे कौन लोग हैं। यह पूरा मामला सिरसा के डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञ जसप्रीत सिंह जस्सी की शिकायत के बाद सामने आया। जस्सी का आरोप है कि उनसे मुख्यमंत्री से जुड़े वायरल वीडियो की जांच रिपोर्ट तैयार करवाने का दबाव बनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि उनसे गुरुग्राम के एक होटल में मुलाकात की गई और कथित तौर पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए 10 लाख रुपये तक की पेशकश की गई। जसप्रीत जस्सी के अनुसार 15 जून को उनके पास एक व्हाट्सएप कॉल आई थी। उन्होंने दावा किया कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को पंजाब सरकार का अधिकारी बताया और मुख्यमंत्री से जुड़े वायरल वीडियो की जांच रिपोर्ट तैयार कराने की बात कही। जस्सी का कहना है कि जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया तो उनसे किसी अन्य लैब से रिपोर्ट तैयार करवाने का अनुरोध किया गया। विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी बता चुके हैं। मान का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं और उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही है। पंजाब सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा और पार्टी के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने दो अलग-अलग फोरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक की थीं। उनका दावा था कि वीडियो के 1100 से अधिक फ्रेम्स की जांच की गई और रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकला कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं है। हालांकि शिकायतकर्ता ने इन रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि जिन लैब्स का नाम लिया गया, उनकी मौजूदगी को लेकर भी संदेह है। यह विवाद तब और गहरा गया जब 15 जून को श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर कड़ी टिप्पणी की गई थी। इसके बाद वीडियो को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हुई और अब मामला पुलिस जांच तक पहुंच चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है। एक तरफ AAP इसे राजनीतिक षड्यंत्र बता रही है, तो दूसरी ओर जांच एजेंसियां मामले की तह तक पहुंचने का दावा कर रही हैं। ऐसे में अब सबकी नजर जांच के अगले चरण और संभावित खुलासों पर टिकी हुई है।
