इंडी गठबंधन ने देशभर में हो रहे मतदाता सूचियों के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में चुनाव आयोग की पक्षपाती भूमिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रधान न्यायाधीश को एक संयुक्त पत्र लिखा है। विपक्ष की 23 पार्टियों एवं एक निर्दलीय सांसद की ओर से भेजे गए इस पत्र में एसआईआर में लक्षित तरीके से मतदाताओं को सूचियों से बाहर करके उन्हें मताधिकार के अधिकार से वंचित करने के लिए चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा किया गया है। इंडी गठबंधन में शामिल दलों के अलावा हाल में गठबंधन से अलग हुई द्रमुक व आम आदमी पार्टी ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इंडी गठबंधन की गत आठ जून को हुई बैठक में SIR के जरिये लोकतंत्र को कमजोर करने के प्रयासों के विरुद्ध सीजेआई को पत्र लिखने के फैसले के अनुरूप मंगलवार को गठबंधन ने संयुक्त पत्र भेजा। कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि विपक्षी दल एकजुटता, एकता और प्रतिरोध (एसयूआरई) पर दृढ़ता से कायम हैं। इस पत्र का ब्योरा उजागर नहीं किया गया है, मगर विपक्ष के सूत्रों के अनुसार पत्र में बिहार चुनाव से पहले शुरू हुए SIR को केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के राजनीतिक फायदे के लिए संचालित कर करोड़ों वोटरों को मतदाता सूची से बाहर करने के डिजायन को रेखांकित किया गया है। विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह पत्र इस विचार पर केंद्रित है कि जब बाकी सब कुछ विफल हो जाता है तो भारत का लोकतंत्र न्यायपालिका की ओर देखता है। यह पत्र न्यायपालिका का अंतरात्मा झकझोरने वाला है और शीर्ष न्यायपालिका को देखना होगा कि आज देश के लोकतंत्र के साथ कैसा खिलवाड़ हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, पत्र पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, झामुमो प्रमुख व झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री व नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव आदि के साथ इंडी गठबंधन में शामिल वामपंथी एवं अन्य दलों के नेताओं के साथ राज्यसभा के निर्दलीय सदस्य कपिल सिब्बल ने हस्ताक्षर किए हैं। द्रमुक व आप नेताओं के भी पत्र पर हस्ताक्षर की पुष्टि करते हुए तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन ने एक्स पर कहा कि यह पत्र इंडी गठबंधन की सभी पार्टियों के सामूहिक प्रयास का नतीजा है।

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